वो शहर जिसने दुनिया को 'वक़्त' बेचा

मारी ज़िंदगी में सही वक़्त की अहमियत ये गीत बख़ूबी बयां करता है. वक़्त की पाबंदी को पेशेवर ज़िंदगी का बुनियादी उसूल माना जाता है. रेलगाड़ियों का चलना हो या हवाई जहाज़ का उड़ना, सब को वक़्त की पाबंदी माननी होती है. आप को दफ़्तर पहुंचना हो, या खाना खाना हो, सारे काम मुक़र्रर समय पर ही हों, तो ठीक माना जाता है. और ये पाबंदी हर ख़ास-ओ-आम पर लागू होती है.

लेकिन, हम आपको अगर ये बताएं कि आज से दो सौ-ढाई सौ साल पहले ऐसा नहीं था, तो शायद आप यक़ीन न करें.

लेकिन, हक़ीक़त यही है.

पूरी कहानी जुड़ी है घड़ियों से. आज हर हाथ और घर में दिखने वाली घड़ी कभी अमीरों का शौक़ थी. इसे कलाई पर नहीं पहना जाता था. ये वो दौर था, जब लोग जेब में घड़ियां लेकर चलते थे. और ये बहुत ही रईस लोगों की पहुंच में हुआ करती थीं.

सवाल ये उठता है कि जब घड़ियां थीं ही नहीं इतनी आम तो, वक़्त की पाबंदी का क्या था?

वाल्थम वाच कंपनी ने बदल दिया दुनिया का नज़रिया

लेकिन, एक कंपनी ने वक़्त को लेकर दुनिया का नज़रिया ही बदल दिया. इस कंपनी का नाम था वाल्थम वॉच कंपनी. उन्नीसवीं सदी में अमरीका के मैसाचुसेट्स राज्य के वाल्थम शहर में स्थापित हुई इस कंपनी ने घड़ियों को आम लोगों तक पहुंचाया था. इसने अमरीकी रेलगाड़ियों को समय पर चलना सिखाया. बाक़ी दुनिया को भी समय चक्र का पालन करने को मजबूर कर दिया.

यूं तो वाल्थम शहर और भी बड़ी कंपनियों जैसे बोस्टन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी और मेत्ज़ मोटरकार कंपनी के लिए मशहूर हुआ. मगर, इसे सबसे ज़्यादा शोहरत मिली वाल्थम वॉच कंपनी की वजह से. इस शहर को 'द वॉच सिटी' यानी घड़ियों वाला शहर कहा जाने लगा.

उन्नीसवीं सदी के मध्य तक घड़ियां ख़ास लोगों की डिमांड पर बनाई जाती थीं. हर घड़ी का कल-पुर्ज़ा ख़ास उसके लिए बनाया जाता था. घड़ियां बनाने का तरीक़ा भी हर घड़ी के हिसाब से बदलता रहता था. इसमें समय भी लगता था और ये महंगा भी बहुत पड़ता था. यही वजह थी कि केवल रईस लोग ही घड़ियां रख पाते थे. दो घड़ियां एक जैसा समय बताएं, ये भी ज़रूरी नहीं हुआ करता था.

लेकिन वाल्थम वॉच कंपनी ने ये सब कुछ बदल डाला. घड़ियों की दुनिया में इंक़लाब ला दिया.

इसकी शुरुआत अमरीका के बोस्टन शहर के घड़ीसाज़ आरोन लुफ्किन डेनिसन ने की. वो तेज़ दिमाग़ का इंसान था. एक बार आरोन, मैसाचुसेट्स के दक्षिण-पश्चिमी इलाक़े में इस्थित स्प्रिंगफील्ड आर्मरी यानी हथियारों के कारखाने में गया. वहां उसने देखा कि हथियारों के कल-पुर्ज़े एक ही बराबर और एक ही डिज़ाइन के बनाए जाते थे. नतीजा ये होता था कि फटाफट ढेर सारे हथियार तैयार हो जाते थे.

तब आरोन ने सोचा कि अगर यही तरीक़ा घड़ियां बनाने में अपनाया जाए, तो कैसा रहेगा? एक ही तरह के कल-पुर्ज़े, डायल और सुइयां हों, तो फटाफट और तेज़ी से घड़ियां तैयार की जा सकेंगी. आरोन ने अपना आइडिया कुछ रईस निवेशकों को बेचा और वो उसकी कंपनी में पैसा लगाने के लिए तैयार हो गए.

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